झूट​​ क़सरत से बोला जाएगा:-

 झूट​​ क़सरत से बोला जाएगा:- 

हदीस:​​ हज़रत​​ अबू​​ हुरैरा​​ (र.आ)​​ से मरवी​​ है​​ के​​ अल्लाह​​ के रसूल​​ (सल्लाहु अलैहि वसल्लम)​​ ने इरशाद फरमाया:​​ क़यामत​​ क़याम होने से पहले​​ फितने​​ ज़ाहिर होंगे, झूठ बकसरत होगा, बाज़ार क़रीब हो जाएँगे। साहीः बुखारी​​ किताब उल फितन​​ 7061

 

 

हदीस:​​ हज़रत अब्दुल्लाह​​ बिन​​ मसूद​​ (र.आ)​​ से मरवी​​ है​​ के:​​ शैतान इंसानी सूरत मे किसी​​ क़ौम के पास आ​​ कर​​ झूठी हदीस सुनाएगा और लोगों मे इंतशहार वक़ीया हो जाएगा, इन मे से एक​​ आदमी कहेगा के मैं ने एक शख्स से यह हदीस सुनी​​ है​​ जिस का चेहरा तो मैं पहचानता हूँ मगर इस का नाम नही​​ जनता। साहीः मुस्लिम​​ मुक़दमा 17

 

 

हदीस:​​ हज़रत अब्दुल्लाह​​ बिन​​ उमरो​​ (र.आ)​​ फरमाते​​ है​​ के:​​ समंदर मे​​ शैतान​​ क़ैद​​ है​​ जिन को​​ सुलेमान​​ (आ.स)​​ ने​​ क़ैद किया था.​​ अंक़ारीब वो​​ निकलेंगे​​ और लोगों को​​ क़ुरान​​ सुनाएँगे​​ (यानी धोका देने के लिए झूठा​​ क़ुरान बना लाएँगे) साहीः मुस्लिम​​ मुक़दमा 18

 

नोट:​​ झूठ का फैल जाना​​ क़यामत​​ की एक निशानी​​ है.​​ यह निशानी अरसा दराज़ से ज़ाहिर हो चुकी​​ है​​ और​​ दिन-बा-दिन​​ बढ़ती जा रही​​ है.

 

क़यामत के क़रीब कुछ​​ लोग​​ ऐसे जाहिर​​ होंगे के​​ अल्लाह​​ के रसूल​​ (सल्लाहु अलैहि वसल्लम)​​ पर झूठ बंधेंगे​​ और झूठी हदीसें गरह​​ के लोगों को सुना कर​​ गुमराह करेंगे।

 

आम गुफ़्तुगू मे झूट बोलना भी​​ गुनाह​​ है​​ लेकिन​​ इल्म-ए-हदीस मे झूट बोलने के बारे​​ मे​​ नबी​​ (सल्लाहु अलैहि वसल्लम)​​ ने फरमाया के:

हदीस:​​ “जिस ने जान बूझ के मुझ​​ पर झूठ बँधा वो अपना ठिकाना​​ जहन्नुम (आग)​​ मे बना ले। साहीः मुस्लिम​​ मुक़दमा 4

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